भारत के अस्पतालों में रोबोटिक तकनीक के उपयोग से बढ़ी विश्वसनीयता : डॉ. सुजॉय भट्टाचार्य

भारत के अस्पतालों में रोबोटिक तकनीक के उपयोग से बढ़ी विश्वसनीयता : डॉ. सुजॉय भट्टाचार्य
सर्वोदय अस्पताल ने पूरी की मिसो के साथ 100 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी
Mukhi Deepak Bharat Darshan Faridabad News, 20 March 2025 : सर्वोदय अस्पताल, सेक्टर 8, फरीदाबाद ने अपनी एक ऐतिहासिक उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मिसो, जो की भारत की पहली पूरी तरह से स्वचालित रोबोटिक प्रणाली है, का उपयोग करते हुए 100 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। यह मील का पत्थर और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सिलवासा में ‘नमो अस्पताल’ के उद्घाटन के दौरान मेरिल की मिसो रोबोटिक प्रणाली की सराहना की, जो ‘मेक इन
इंडिया’ नवाचारों में भारत की अग्रणी भूमिका को विशेष मजबूती प्रदान करता है।मिसो न केवल भारत में, बल्कि जर्मनी, स्पेन, मैक्सिको और इटली के सर्जनों द्वारा भी सराहा गया है। इसकी सटीकता, दक्षता और एर्गोनोमिक डिजाइन ने इसे एक प्रमुख उपकरण बना दिया है। पारंपरिक रोबोटिक प्रणालियों से अलग, मिसो को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह किसी भी ऑपरेशन थिएटर में आसानी से समायोजित हो सकता है, चाहे अस्पताल की जगह सीमित ही क्यों न हो। इसके परिणामस्वरूप, भारत भर में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी को अब और अधिक सुलभ और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है। आज आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सर्वोदय अस्पताल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. सुजॉय भट्टाचार्य ने कहा कि सर्वोदय में मिसो की स्वीकृति भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक अहम कदम है। हमें गर्व है कि हम स्वदेशी रोबोटिक तकनीक के उपयोग में अग्रणी हैं, जो न केवल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को बदल रही है, बल्कि भारत के अस्पतालों में इसकी विश्वसनीयता और सम्मान बढ़ा रही है। जब जर्मनी, स्पेन, मैक्सिको और इटली के प्रमुख सर्जन मिसो की उत्कृष्टता की सराहना करते हैं, तो यह हमारे वैश्विक स्तर पर सर्जिकल रोबोटिक्स में एक नई पहचान को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस अवसर पर डॉ. राकेश गुप्ता, सर्वोदय हेल्थकेयर के चेयरमैन ने कहा, हमने मिसो का उपयोग करके 100 सर्जरी सफलतापूर्वक की है, जो विभिन्न आयु समूहों, चिकित्सा जटिलताओं और विकृतियों से प्रभावित मरीजों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। एक 65 वर्षीय पुरुष, जिसे दोनों घुटनों में दर्द और क्रेपिटस था, से लेकर 46 वर्षीय महिला, जो द्विपक्षीय जोड़ रेखा में दर्द और वेरस विकृति से पीडि़त थीं, ऐसे मामले एक अलग ही चुनौतियाँ प्रदान करता था। फिर भी, उन्नत सर्जिकल विशेषज्ञता और मिसो की प्रौद्योगिकी ने हमें इन मरीजों को गतिशीलता बहाल करने और उन्हें दर्दमुक्त जीवन सुनिश्चित करने में सफल बनाया है। हम गर्व से कहते हैं कि हम ‘मेक इन इंडिया’ नवाचारों का समर्थन कर रहे हैं, जो न केवल स्वास्थ्य सेवा मानकों को नया रूप दे रहे हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में अद्वितीय बदलावों की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। मिसो के साथ, भारत नी रिप्लेसमेंट प्रक्रियाओं में एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है। अब आयातित रोबोटिक प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय, हम अपनी खुद की विश्वस्तरीय तकनीक का निर्माण कर रहे हैं। डे-केयर नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की शुरुआत एक नए युग का प्रतीक है, जिसमें रोगी की रिकवरी, दक्षता और पहुँच में अभूतपूर्व सुधार हो रहा है।