डीएवी सेंचुरी कॉलेज ने नई पहल करते हुए ” ग्रेट इंडियन विलेज टूरिजम मेले ” का सफलता पूर्वक आयोजन किया।

CITYMIRR0RS-NEWS- विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर डीएवी सेंचुरी कालेज द्वारा नयी पहल करते हुए ” ग्रेट इंडियन विलेज टूरिजम मेला ” का आयोजन किया गया ताकि हरियाणवी संस्कृति और ग्रामीण परिवेश से लोग जुड़ सके और गावों में भी टूरिजम को बढ़ावा मिले और इसके माध्यम से गांव के युवाओ को गांव में ही रोजगार मिल सके. कालेज प्रिंसिपल के मुताबिक़ विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर कालेज प्रांगण में गांव के माहौल को थीम बनाते हुए इसका आयोजन किया गया है ताकि ग्रामीण संस्कृति ज़िंदा रह सके. इस मौके पर फरीदाबाद की मेयर सुमन बाला ने मेले का शुभारम्भ करते हुए ग्रामीण खेलो में हिस्सा लिया और ऊँठ की सवारी भी की. इस मौके पर छात्र छात्राओं में भी भारी उत्साह देखा गया। डीएवी सेंचुरी कालेज के प्रांगण में गांव जैसा माहौल दिखाई दिया। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर कालेज प्रशासन द्वारा ” ग्रेट इंडियन विलेज टूरिजम मेले ” का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम का शुभारम्भ फरीदाबाद की मेयर सुमन बाला ने दीप प्रवलित करके किया। मेले का अवलोकन करते हुए उन्होंने सभी स्टाल्स देखे और ऊँठ की सवारी करते हुए निशानेबाज़ी से लेकर गुलेल भी चलाई। कालेज प्रशासन को बधाई देते हुए मेयर ने कहा की आज हम आज के दौर में अपना भारतीय कल्चर भूलते जा रहे है और आज का युवा सिर्फ मोबाइल तक सिमित रह गया है. पहले बच्चे और युवा देसी खेलो में व्यस्त रहते थे जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास होता था वहीँ आपसी भाईचारा भी बना रहता था. लेकिन आज इस हरियाणवी सांस्कृति मेले में पुराने दिनों की यादें ताज़ा हो गयी. उन्होंने कहा की वह चाहती है की ग्रामीण टूरिजम को भी बढ़ावा मिले और गांव के बच्चो को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो. आज हम हरियाणवी सांस्कृति , पहरावा , खान पान और ग्रामीण खेलो को भूलते जा रहे है और ऐसे कार्यक्रम के आयोजन से बच्चो और और युवाओ को इस और मोड़ा जा सकता है।
कालेज के प्रिंसिपल सतीश आहूजा ने बताया की आज विश्व पर्यटन दिवस पर हमने नयी पहल करते हुए गांव के माहौल को थीम बनाते हुए इस मेले का आयोजन किया है और दिखाने की कोशिश की है की गांव की संस्कृति क्या होती है क्योंकि देश की 75 फीसदी आबादी आज भी गांव में रहती है जहाँ आपसी भाईचारा और मेल मिलाप हमारी हरियाणवी संस्कृति की धरोहर है. इसी तरह हमने ऊँठ , घोड़े और हाथी की सवारी के साथ साथ ग्रामीण खेलो को भी इस मेले में दर्शाया है की किस प्रकार गावो के अंदर गुल्ली डंडा , पतंगबाज़ी , कंचे खेले जाते है वहीँ हरियाणवी संगीत को भी यहाँ दर्शाया गया है ताकि आज के युवा मोबाइल से दूर रहे यह सन्देश देने की कोशिश की गयी है। ग्रामीण परिवेश के इस मेले के आयोजन को लेकर छात्र रिशू और करन में भी भारी उत्साह देखा गया। उनका का कहना था की आज हमारा भारतीय कल्चर हमने दूर होता जा रहा है और यह मोबाइल तक ही सिमित रह गया है। पहले तरह तरह के खेलो को खेला जाता था जिससे युवा और बच्चे फिट रहते थे और आपसी प्यार बना रहता था. इन सबके चलते कालेज द्वारा एक बार फिर ग्रामीण माहौल को दर्शाया गया है जिसे छात्र खूब इंजॉय कर रहे है।